​ऐ वक्त तू कुछ पीछे लोट जा, कुछ अधूरे काम निपटाने हैं मुझे। कही हँसी छूटी हैं तो कही गम संभालना हैं, मेरे अपनों का धर्म संभालना हैं। कहावत बनकर न रह जाये,  कही मुआमले मरहम के। कही दबिश में न गुजर जाये, कोपले नये रंग के। जरा सा रुक, कहानियाँ बन जायेगी, दो लम्हात […]

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