​ग़र फ़िरदौस-ए-बरूहे ज़मीं अस्तो हमीं अस्तो। हमीं अस्तो। हमीं अस्तो। जन्नत है धरती पर सुना था मैंने लेकिन जन्नत कभी देखा नहीं, मगर यक़ीन है इतना मुझे तुझसे हसीन वो होगा नहीं। सब कहते हैं जन्नत ने  कोई झील छुपाये रखा है बसते हैं शहर से घर उसपे दाल झील नाम सबने सुनाया है। बसते […]

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