Beauty and love

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अगर वक्त मिले तो रुख करना अपनी और,
Beauty and love
के इस डगर पे भी फूल खिलते है तेरे नाम के,
तू आह की सीमा से परे, बदलो में रहता है सायद,
जान ले इस सीने में भी आह उठती है तेरे खातीर.....
तू लाख चुनवाले दीवारे,
या बड़ा ले उचाईया,
तेरे रुतबे की,
मगर मुहबत पत्थरो से निकलती है सायद......
अगर यकीन नही तो आना मेरे गाव,
यहाँ मुहबत में पत्थर भी भगवान बने बेठे है...

by: Aavara Banjara 
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