तड़प (Tadap)

Leave a Comment
एक बात बताओ ऐ-जाना
तड़प (Tadap)
क्यू दिल को किया था बेगाना
जब तुझको छोडके जाना ही था
क्यू प्यार किया था बतलाना

काफी था दर पे दर्द मेरे,
बिन तेरे भी सीते थे जख्म गहरे,
कुछ पल का मरहम करके यूं
क्या ठीक रहा अकेला कर जाना

वो कागज बनके डोल रहे,
जो श्याही नहीं, अब खून पिये,
गैरो के लहू की बात नहीं,
यह लहू जिगर का चाहती है....


उजला तेरा चहरा वो,
अंधियारों में आज भी रोशन हो,
कैसे मै भर लू शाम मेरी,
तन्हाई पूछे जाती है.............

नया जोड़ जिगर का जहा करू,
हर शक्श में ढूंढें बात वही,
निरा नजर का दोष कहा,
ये रूह ही मेरी प्याशी है.............

By:- Aavara Banjara
Next PostNewer Post Previous PostOlder Post Home