शशिकांत निशांत शर्मा 'साहिल' शर्दी न कटे बिना रजाई सजनी बिना सताए जुदाई कब से हु तन्हा मै यहाँ तू वहा मै तुम्हे कितना चाहता हु जन से बढकर जन मानता हु पर एक तुम हो बेरहम बेदर्द सनम हो चाहने वालों को सताती हो रातों में सपनों में आती हो लहरों की तरह […]

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