महलों की छत से मत झांको, आओ बंधु नीचे आओ इन वीरान अंधी गलियों में कोई आकर दीप जलाओ सारा शहर उजियारे से रोशन है गंदी बस्ती में तम का शासन है केवल रईस तो रोशनी का हकदार नहीं झुग्गी को क्या दीपक का अधिकार नहीं गरीबी के आँचल के तले से ये अँधियारा हटाओ। […]

Read more of this post