किस्से करूँ मैं शिकवा सिकायत  मालूम हैं हमें ये हकीकत  नहीं बचीं हैं किसी में आदमियत  पर हैं जिन्दगी की अपनी जरुरत  बिना इजहार किये अपनी चाहत  नहीं मिलता इस दिल को फुर्सत  शिकवा करूँ मैं जुल्मों सितम का  या इजहार करूँ मैं दास्ताँ-ए-गम का  जब यादों की सिलवटें खुलती है  हमें रातों में सोने […]

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