अनजाने, अपरिचित है हम  रहते है एक ही बस्ती में  मेरा परोसी रो रहा है माना रहा है मातम  इधर हम झूम रहे है मस्ती में  दो चेहरें है एक ही शख्स के  पता नहीं किसकी क्या हस्ती है इस बस्ती में  अजब अंदाज है यार इश्क के  गस्त खाकर गिरते-मरते है मिट्टी में  जीवन […]

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