हमारे चारो ओर  लगी है  लोहे  कांटेंदार बाड़  सामने है  लम्बी सड़क  उभड़ खाभड़ बांध दिया गया है हाथ पर  और धकेल दिया गया  हम न चल सके  सिर्फ लुढक रहे हैं हम  लुढ़क ही रहे है ...     शाशिक्नत निशांत शर्मा 'साहिल'

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