ये सारी दुनिया  अपनी इंडिया  है मतवालों की महफ़िल  सोचता है साहिल  कौन सुनेगा दास्ताँ-ए-गम  इसिलए चुप रहता हूँ हरदम  जब हो जाती है ऑंखें नम  पोंछ लेता हूँ खुद ही  अपना आंसू  सोचकर ये  सबके पास है थोड़ा थोड़ा गम  अपना गम है कितना कम  शशिकांत निशांत शर्मा 'साहिल'

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