शशिकांत निशांत शर्मा 'साहिल'   मनुष्य का मन होता है चंचल रहता है सदैव गतिशील होता नित आकर्षण और कभी विकर्षण मन के पंछी पर न चलता किसी का जोर उर जाता उस ओर जहा रमता इसका मन रहता मस्त मगन उर रहा गगन में तो कभी वन में पर मनुष्य यह लो मान […]

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