शशिकांत निशांत शर्मा 'साहिल' काली काली बादलों और नील गगन से बारिस की बूंदें जब गिरती हैं रिम-झिम रिम-झिम तब यह धरती नाच उठती हैं छम छम छम बारिश की बूंदें उस गगन से खेलती हैं हमारे संग आँख मिचौली बदलें काली-काली उसी दूर गगन से वर्षा की रानी करती बारिस गिरता पानी मिटता प्यास […]

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