​कपकपाती रौशनी को देखने,  हुजूम उलटते हैं। डरते हैं, कतराते हैं, साहिब...... फिर भी, कदम न रुकते हैं। होंटों पे लिए नन्ही सी हँसी, वो नव कोपल भी साथ आती हैं। पापा के कंधों पे बैठ,  नन्ही कलि हर्षाती हैं। भविष्य को उठाये कंधो पे,  देखो आज खड़ा हैं। उसको अपनी ख्याति पे, नाज बड़ा […]

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