आज महज एक नारी हूँ मैं

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नाम -आरती
पिता - श्री कर्म बीर
माता -श्रीमती सरोज शर्मा
शिक्षा - एम० ए०,(NET)
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ना मैं जनक नंदनी सीता 
ना रधुवंश की कुलवधू
ना प्रभु श्रीराम की भार्या
और ना लव कुश की जननी 
आज महज एक नारी हूँ मैं 
अपने अस्तित्व को तलाशती
अर्थहीन जीवन को नए अर्थ देती 
आज महज एक नारी हूँ मैं 
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सूखी- नीरस घास के जैसे
पल भर में उखड़ने की 
चाहत थी मेरी 
मैं भी कोमल- नाजुक
ओस की बूंद की तरह 
चमकना चाहती थी 
उमश और तपीश भरी धूप में 
जलना भी चाहती थी 
चाँद और तारों के साथ  
अपनी रातें बिताना चाहती थी 
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पर, नहीं चाहती थी मैं 
भ्रमित और सन्देही लोगों द्वारा 
अपमानित होना 
जीवन के हर पड़ाव को परीक्षा से 
पुष्पित और सुसज्जित करना 
नहीं  चाहती थी मैं 
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आज महज एक नारी हूँ मैं 
मुझमें टीस भी है 
और पीड़ा भी 
और वेदना की कसक भी है 
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आज महज एक नारी हूँ मैं 
सभी नारियों की आस्था हूँ मैं 
उनका विश्वास भी हूँ 
और प्रेरणा भी
आज महज एक नारी हूँ मैं 

------ आरती ------


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